Moon Springs

ख्वाहिश, ख़्वाब और ख़ुश्बू

अक्सर

चुरा लेता हूँ मैं 

कुछ ख़्वाहिशों को

अपने

ख़्वाबों की शाखों से

और रख लेता हूँ उन्हें

अपनी जेब में

फिर

जब भी जेब में

हाथ डालता हूँ

ख़्वाहिशें चूम लेती हैं

मेरी उँगलियों को

और याद दिलाती हैं

कि वो वहीँ हैं

मगर

जब उन ख्वाहिशों से 

आने लगती है 

पुराने ख्वाबों की ख़ुश्बू 

तो समझ जाता हूँ

कि धोने का वक़्त आ गया है

कमबख्त पतलून को!!

ख्वाहिश, ख़्वाब और ख़ुश्बू

अक्सर

चुरा लेता हूँ मैं 

कुछ ख़्वाहिशों को

अपने

ख़्वाबों की शाखों से

और रख लेता हूँ उन्हें

अपनी जेब में

फिर

जब भी जेब में

हाथ डालता हूँ

ख़्वाहिशें चूम लेती हैं

मेरी उँगलियों को

और याद दिलाती हैं

कि वो वहीँ हैं

मगर

जब उन ख्वाहिशों से 

आने लगती है 

पुराने ख्वाबों की ख़ुश्बू 

तो समझ जाता हूँ

कि धोने का वक़्त आ गया है

कमबख्त पतलून को!!

Written – March 7, 2020
Uploaded – October 20, 2025

“Get my latest writings straight to your inbox.”