Moon Springs
Author in late 1970s. Pic courtesy Aloke Gupta
किसे याद रखूं
किसे भूल जाऊं
कि तुम कौन हो
नाम क्या है मेरा
ये किससे मैं पूछूं
और किसको बताऊँ
मगर सच तो ये है
कि बस में नहीं है
इसे याद रखना
उसे भूल जाना
नहीं याद आये
तो कैसे बताऊँ
तुम्ही अब ये बोलो
क्या सच ये नहीं है
तुम्हारे होठों पे हमेशा
नाम होता था मेरा
और तुम्हारे नाम से
होता था मेरा सवेरा
अब ये है आलम
भूल जाना अदा है
ये किसने कहा
याद रखना वफ़ा है
मगर ये अदा है
और न ही वफ़ा है
ये तो मेहरबां
बुढ़ापे का फलसफा है !!
बूढ़ा चाँद मोटी ऐनक लगाए
झाँक रहा था खिड़की से
मगर रोशन न कर सका कमरे को
सुबह हुई और उसी खिड़की से
धूप उतर आयी दबे पाँव
कर दिया कमरे को रौशनी से
सराबोर
उस धूप का एक टुकड़ा काट
लिया मैंने
और रख लिया तकिये के नीचे
आज रात जब चाँद आएगा
तो लगा दूंगा धूप का पैबंद
Written – February 28, 2016Uploaded – December 31, 2025
Cave homes near Uchisar Castle, near Cappadocia, Turkey, June 6, 2024
“Get my latest writings straight to your inbox.”
Check your inbox or spam folder to confirm your subscription.