इसका-उसका चाँद
जुलूस पर जुलूस
दहशत ही दहशत
छोटे छोटे घरों में
दुबके बैठे लोग
नए हादसे के इंतज़ार में
दरवाज़े पे गुस्सैल दस्तक
अनजान चेहरे पे नक़ाब
आँखों में अंगारे
हाथ में खंजर
साले क्या नाम है तेरा?
नाम हलक़ से निकला
मगर लपक लिया मैंने
उसे अपने हाथों में
न पहुंचा खंजर की नोक तक
फुंकारता नक़ाबपोश आगे बढ़ा
और मैं खिसका पीछे
आग आग की चीखों ने
उसे कुछ उलझाया
पलट के बाहर भागा
शोर बढ़ा, चीखें भी
सांस में सांस आई
हिम्मत की बाहर आया
पास के नुक्कड़ पे
उमड़ा था हुजूम लोगों का
हर एक के हाथ में पत्थर थे
हरे हरे, गेरुए और कुछ बेरंग
बस जैसे उड़ने को तैयार
अपने हाथों में देखा
तो चाँद था
किधर फेंकता उसे
न था वो ईद का
न पूनम का
बस यूँ ही खड़ा रहा
हाथ में नाम लिए
चाँद लिए
- October 16, 2025
इसका-उसका चाँद
जुलूस पर जुलूस
दहशत ही दहशत
छोटे छोटे घरों में
दुबके बैठे लोग
नए हादसे के इंतज़ार में
दरवाज़े पे गुस्सैल दस्तक
अनजान चेहरे पे नक़ाब
आँखों में अंगारे
हाथ में खंजर
साले क्या नाम है तेरा?
नाम हलक़ से निकला
मगर लपक लिया मैंने
उसे अपने हाथों में
न पहुंचा खंजर की नोक तक
फुंकारता नक़ाबपोश आगे बढ़ा
और मैं खिसका पीछे
आग आग की चीखों ने
उसे कुछ उलझाया
पलट के बाहर भागा
शोर बढ़ा, चीखें भी
सांस में सांस आई
हिम्मत की बाहर आया
पास के नुक्कड़ पे
उमड़ा था हुजूम लोगों का
हर एक के हाथ में पत्थर थे
हरे हरे, गेरुए और कुछ बेरंग
बस जैसे उड़ने को तैयार
अपने हाथों में देखा
तो चाँद था
किधर फेंकता उसे
न था वो ईद का
न पूनम का
बस यूँ ही खड़ा रहा
हाथ में नाम लिए
चाँद लिए
Written – April 10, 2023
Uploaded – October 20, 2025
Full moon above the library building (middle section) at the Louis Kahn Plaza (LKP) competing with other artificial moons. Indian Institute of Management, Ahmedabad, Gujarat India. August, 2020.
Artists’ recreation of full moon in a village setting. Tribal Museum, Bhopal, Madhya Pradesh, India. February 26, 2019.
अपने हाथों में देखा
तो चाँद था
किधर फेंकता उसे
न था वो ईद का
न पूनम का ….
अब हथेली मे चांद लिए खड़े रहना ही हमारे हिस्से मे रह गया है…